आयुर्वेद · AYU-103

अष्टाङ्गहृदयम्

Aṣṭāṅga Hṛdayam

गुरुवआचार्य वाग्भटसंकायआयुर्वेद
इस पाठ्यक्रम के बारे में

अष्टाङ्गहृदयम्

आचार्य वाग्भट द्वारा रचित अष्टाङ्गहृदयम् चरक और सुश्रुत के उपदेशों को सुगठित, सहज-स्मरणीय संस्कृत श्लोकों में प्रस्तुत करता है। इसके नाम का अर्थ है 'आठ अंगों वाले शास्त्र का हृदय', और इसमें काय-चिकित्सा, कौमारभृत्य से लेकर रसायन तक आयुर्वेद के आठों अंग समाहित हैं। छह स्थानों में व्यवस्थित यह ग्रन्थ दिनचर्या और ऋतुचर्या से आरम्भ होकर शरीर, निदान और चिकित्सा की ओर बढ़ता है। इस पाठ्यक्रम में इसे एक शास्त्रीय ग्रन्थ के रूप में पढ़ा जाता है, उपचार-परामर्श के रूप में नहीं।

आप क्या सीखेंगे

  • आयुर्वेद के आठ अंग और उनका क्षेत्र
  • वाग्भट के अनुसार दिनचर्या और ऋतुचर्या
  • चरक और सुश्रुत का समन्वय कैसे हुआ

पाठ

  1. 1परिचय: वाग्भट और उनका समन्वय🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  2. 2आयुर्वेद के आठ अंग🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  3. 3सूत्रस्थान: दिनचर्या और ऋतुचर्या🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  4. 4शारीर और निदान: शरीर और रोग🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  5. 5चिकित्सा और कल्प-सिद्धि: एक झलक🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  6. 6उत्तरस्थान और ग्रन्थ की विरासत🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
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