पुराण इतिहास · PUR-111
ब्रह्माण्ड पुराण
Brahmāṇḍa Purāṇa
ब्रह्माण्ड पुराण
ब्रह्माण्ड पुराण का नाम उस ब्रह्माण्ड, अर्थात् विश्व-अण्ड पर है, जिससे समस्त सृष्टि प्रकट होती है। चार पादों में व्यवस्थित यह ग्रन्थ सृष्टि, लोक-रचना, मन्वन्तर और राजवंशों का वर्णन करता है, और इसकी बहुत-सी सामग्री वायु पुराण से मेल खाती है। इसके परिशिष्ट रूप ललितोपाख्यान में, जहाँ हयग्रीव महर्षि अगस्त्य को उपदेश देते हैं, श्रीविद्या उपासना का केन्द्र ललिता सहस्रनाम है; अध्यात्म रामायण को भी परम्परा से इसी का अंग माना जाता है। दो खण्डों का यह पाठ्यक्रम सृष्टि-विज्ञान और भक्ति, दोनों को खोजता है।
आप क्या सीखेंगे
- विश्व-अण्ड और पौराणिक सृष्टि-विज्ञान
- चार पाद और वायु पुराण से सम्बन्ध
- ललिता परम्परा और अध्यात्म रामायण का सम्बन्ध
पाठ
- 1ब्रह्माण्ड पुराण: परिचय🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 2ब्रह्माण्ड और सृष्टि🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 3लोक, द्वीप और काल-गणना🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 4मनु, ऋषि और राजवंश🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 5ललितोपाख्यान और ललिता सहस्रनाम🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 6अध्यात्म रामायण की परम्परा🔒 नामांकन के बाद खुलेगा