पुराण इतिहास · PUR-112
ब्रह्मवैवर्त पुराण
Brahmavaivarta Purāṇa
ब्रह्मवैवर्त पुराण
ब्रह्मवैवर्त पुराण श्रीकृष्ण को परम तत्त्व के रूप में प्रस्तुत करता है, जिनसे ब्रह्मा, विष्णु और शिव सहित समस्त सृष्टि प्रकट होती है। ब्रह्म, प्रकृति, गणेश और कृष्ण-जन्म — इन चार खण्डों में यह राधा को श्रीकृष्ण की नित्य सहचरी के रूप में केन्द्रीय स्थान देता है और देवी को अनेक रूपों वाली प्रकृति के रूप में देखता है। विद्वानों के अनुसार उपलब्ध पाठ बाद की शताब्दियों में काफ़ी परिवर्तित हुआ है। राधा-कृष्ण भक्ति को समझने के लिए यह अनिवार्य ग्रन्थ है।
आप क्या सीखेंगे
- चार खण्ड और उनके विषय
- परम तत्त्व श्रीकृष्ण और राधा का सिद्धान्त
- प्रकृति, देवी और गणेश की कथाएँ
पाठ
- 1ब्रह्मवैवर्त पुराण: परिचय🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 2ब्रह्म खण्ड: सृष्टि के मूल श्रीकृष्ण🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 3प्रकृति खण्ड: देवी के रूप🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 4गणेश खण्ड: गणेश-जन्म और लीलाएँ🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 5कृष्ण-जन्म खण्ड: व्रज-लीला🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 6भक्ति-सिद्धान्त में राधा🔒 नामांकन के बाद खुलेगा