ज्योतिष गणित · JYO-101
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त
Brāhmasphuṭasiddhānta
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त
628 ई. में आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा रचित ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त खगोलशास्त्र और गणित, दोनों का युगान्तकारी ग्रन्थ है। ग्रहों की स्थिति और ग्रहणों की गणना-विधियों के साथ-साथ इसमें शून्य और ऋणात्मक संख्याओं के साथ गणना के स्पष्ट नियम, द्विघात समीकरणों के हल और चक्रीय चतुर्भुज के क्षेत्रफल जैसे प्रसिद्ध ज्यामितीय सूत्र मिलते हैं। अरबी अनुवाद के माध्यम से इसका प्रभाव इस्लामी जगत तक पहुँचा। चार खण्डों का यह पाठ्यक्रम इसे ऐतिहासिक सन्दर्भ में, श्लोक-दर-श्लोक, वास्तविक विज्ञान के रूप में पढ़ता है।
आप क्या सीखेंगे
- शून्य, ऋणात्मक संख्याओं और द्विघात समीकरणों के नियम
- ग्रह-स्थिति और ग्रहण-गणना की भारतीय विधियाँ
- विश्व गणित-इतिहास में इस ग्रन्थ का स्थान
पाठ
- 1परिचय: ब्रह्मगुप्त और सिद्धान्त-परम्परा🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 2काल, पंचांग और मध्यम गति🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 3स्पष्ट ग्रह-स्थिति और ग्रहण🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 4शून्य और ऋणात्मक संख्याओं का गणित🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 5बीजगणित: द्विघात और अनिर्धार्य समीकरण🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 6ज्यामिति, चक्रीय चतुर्भुज और विरासत🔒 नामांकन के बाद खुलेगा