आयुर्वेद · AYU-101
चरक संहिता
Caraka Saṃhitā
चरक संहिता
चरक संहिता आयुर्वेद के काय-चिकित्सा (आंतरिक चिकित्सा) विभाग का आधार-ग्रन्थ है। इसमें आचार्य आत्रेय पुनर्वसु द्वारा अपने शिष्य अग्निवेश को दिया गया उपदेश सुरक्षित है, जिसे चरक ने संशोधित किया और बाद में दृढ़बल ने पूर्ण किया। आठ स्थानों में बँटा यह ग्रन्थ दोष, आहार, दिनचर्या, रोग-निदान और वैद्य के कर्तव्यों पर विचार करता है। इस पाठ्यक्रम में अत्रिदेव गुप्त की हिन्दी टीका के साथ इसे एक शास्त्रीय परम्परा के रूप में पढ़ा जाता है, चिकित्सा-परामर्श के रूप में नहीं।
आप क्या सीखेंगे
- चरक संहिता की संरचना और इतिहास
- त्रिदोष, अग्नि, धातु और स्वस्थ जीवन की मूल अवधारणाएँ
- स्वास्थ्य, आहार और वैद्य-धर्म पर चरक का चिन्तन
पाठ
- 1परिचय: चरक और आयुर्वेद परम्परा🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 2सूत्रस्थान: स्वस्थ जीवन के सिद्धान्त🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 3दोष, धातु और अग्नि की समझ🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 4निदान और विमान: रोग का विवेचन🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 5शारीर और इन्द्रिय: शरीर, मन, इन्द्रियाँ🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 6चिकित्सा, कल्प और सिद्धि: एक झलक🔒 नामांकन के बाद खुलेगा