पुराण इतिहास · PUR-109
मत्स्य पुराण
Matsya Purāṇa
मत्स्य पुराण
मत्स्य पुराण भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार से आरम्भ होता है, जो महाप्रलय में मनु, जीवन के बीजों और ऋषियों की रक्षा करते हैं और जल उतरने पर मनु को उपदेश देते हैं। इसी संवाद से ग्रन्थ अनेक विषयों तक फैलता है — सृष्टि और मन्वन्तर, राजवंश, व्रत और दान, तथा मन्दिर-वास्तु और प्रतिमा-निर्माण पर पौराणिक साहित्य के कुछ सबसे विस्तृत अध्याय। दो खण्डों वाला यह पाठ्यक्रम इसकी कथाओं और धर्म तथा पवित्र कला पर इसकी व्यावहारिक शिक्षाओं, दोनों को पढ़ता है।
आप क्या सीखेंगे
- प्रलय-कथा और मत्स्य-मनु संवाद
- व्रत, दान और धर्म पर पौराणिक शिक्षा
- मन्दिर-वास्तु और प्रतिमा-विज्ञान पर पारम्परिक निर्देश
पाठ
- 1मत्स्य पुराण: परिचय🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 2मत्स्य अवतार और महाप्रलय🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 3सृष्टि, मनु और राजवंश🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 4व्रत, दान और राजधर्म🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 5मन्दिर-वास्तु🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 6प्रतिमा-विज्ञान और मूर्ति-निर्माण🔒 नामांकन के बाद खुलेगा