भक्ति स्तोत्र · BHK-108

राघवयादवीयम्

Rāghavayādavīyam

गुरुवकवि वेंकटाध्वरीसंकायभक्ति और स्तोत्र
इस पाठ्यक्रम के बारे में

राघवयादवीयम्

सत्रहवीं शताब्दी के कवि वेङ्कटाध्वरी द्वारा रचित राघवयादवीयम् संस्कृत चित्रकाव्य का अद्भुत उदाहरण है। इसके तीस श्लोकों में से प्रत्येक को सीधा (अनुलोम) पढ़ने पर श्रीराम की कथा का अंश मिलता है, और उसी श्लोक को अक्षर-अक्षर उलटा (विलोम) पढ़ने पर श्रीकृष्ण की कथा कहता एक नया श्लोक बन जाता है। इस प्रकार दोनों अवतारों की स्तुति में कुल साठ श्लोक बनते हैं। यह पाठ्यक्रम कवि की इस कला का रहस्य खोलता है, प्रत्येक श्लोक-युग्म का अर्थ समझाता है और संस्कृत शब्द-क्रीड़ा की व्यापक परम्परा से परिचित कराता है।

आप क्या सीखेंगे

  • संस्कृत में अनुलोम-विलोम काव्य की रचना-विधि
  • काव्य में वर्णित राम और कृष्ण की कथाएँ
  • चित्रकाव्य और संस्कृत शब्द-क्रीड़ा की परम्परा

पाठ

  1. 1परिचय: वेङ्कटाध्वरी और चित्रकाव्य🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  2. 2संस्कृत विलोम-काव्य की रचना🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  3. 3अनुलोम: श्रीराम की कथा🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  4. 4विलोम: श्रीकृष्ण की कथा🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  5. 5श्लोक-युग्मों का साथ-साथ पाठ🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  6. 6संस्कृत काव्य-क्रीड़ा की विरासत🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
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