दर्शन उपनिषद् · DAR-106

साधक संजीवनी

Sādhaka Sañjīvanī

गुरुरस्वामी रामसुखदाससंकायदर्शन और उपनिषद्
इस पाठ्यक्रम के बारे में

साधक संजीवनी

साधक संजीवनी स्वामी रामसुखदास जी द्वारा श्रीमद्भगवद्गीता पर लिखी विस्तृत हिन्दी टीका है, जो गीता प्रेस से प्रकाशित है। अध्याय-दर-अध्याय चलते हुए यह प्रत्येक श्लोक की व्याख्या साधना की दृष्टि से करती है — एक साधारण व्यक्ति कर्म, ज्ञान और भक्ति पर श्रीकृष्ण की शिक्षा को परिवार, काम और अन्तर्जीवन में कैसे उतारे। इसकी भाषा आत्मीय, सीधी और पारिभाषिक जटिलता से मुक्त है। इसका अध्ययन गीता की गहरी समझ के साथ आध्यात्मिक जीवन का व्यावहारिक ढाँचा भी देता है।

आप क्या सीखेंगे

  • श्लोक-दर-श्लोक गीता की व्यावहारिक समझ
  • कर्म, ज्ञान और भक्ति — परस्पर पूरक मार्ग
  • काम, परिवार और अन्तर्जीवन में गीता का प्रयोग

पाठ

  1. 1परिचय: स्वामी रामसुखदास और गीता🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  2. 2अर्जुन का विषाद और कर्म का आह्वान🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  3. 3कर्मयोग: अनासक्त कर्म🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  4. 4ज्ञानयोग: आत्म-ज्ञान🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  5. 5भक्तियोग: भगवान् की शरणागति🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  6. 6दैनिक जीवन में गीता🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
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