वेद विद्या · VED-102

सामवेद

Samaveda

गुरुजमहर्षि जैमिनिसंकायवैदिक अध्ययन
इस पाठ्यक्रम के बारे में

सामवेद

सामवेद गान का वेद है। इसके अधिकांश मन्त्र ऋग्वेद से लिए गए हैं, किन्तु यहाँ वे स्वर-लय (साम) में ढलकर यज्ञ के समय उद्गाता द्वारा गाए जाते हैं। यह ग्रन्थ मुख्यतः दो भागों — पूर्वार्चिक और उत्तरार्चिक — में बँटा है, और गान-ग्रन्थ इसकी धुनों को सुरक्षित रखते हैं। भारतीय परम्परा इसे पवित्र संगीत का मूल मानती आई है। महर्षि जैमिनि की परम्परा में इसका अध्ययन करते हुए आप जानेंगे कि उपासना में शब्द, छन्द और स्वर कैसे एक हो जाते हैं।

आप क्या सीखेंगे

  • ऋग्वेद की ऋचाएँ साम-गान कैसे बनीं
  • पूर्वार्चिक, उत्तरार्चिक और गान-ग्रन्थों की संरचना
  • यज्ञ में स्वर और उद्गाता की भूमिका

पाठ

  1. 1परिचय: गान का वेद🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  2. 2ऋक् से साम तक🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  3. 3पूर्वार्चिक और उत्तरार्चिक🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  4. 4गान-ग्रन्थ: धुनों की पोथियाँ🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  5. 5उद्गाता और सोम-याग🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  6. 6साम, स्वर और पवित्र संगीत🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
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