वेद विद्या · VED-106
संध्या रहस्य
Sandhyā Rahasya
संध्या रहस्य
‘सन्ध्या रहस्य’ पण्डित चमूपति की प्रसिद्ध कृति है, जो आर्य समाज की परम्परा में प्रचलित दैनिक वैदिक सन्ध्या का मर्म समझाती है। आर्य समाज के विख्यात विद्वान् और लेखक चमूपति जी सन्ध्या के प्रत्येक चरण — आचमन, प्राणायाम, मार्जन, अघमर्षण, उपस्थान और गायत्री मन्त्र — को क्रम से लेकर उसके अर्थ और भीतरी भाव को स्पष्ट करते हैं। यह पाठ्यक्रम रटे हुए पाठ को दिन की सन्धि-वेलाओं में किए जाने वाले सचेत, हृदयपूर्ण ध्यान और आत्म-निरीक्षण में बदल देता है।
आप क्या सीखेंगे
- दैनिक सन्ध्या के प्रत्येक मन्त्र का अर्थ
- आचमन, प्राणायाम और अघमर्षण का भीतरी उद्देश्य
- सन्ध्या को जीवन्त ध्यान-साधना कैसे बनाएँ
पाठ
- 1परिचय: सन्ध्या क्यों आवश्यक है🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 2आचमन और अंग-स्पर्श: पूर्व-तैयारी🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 3प्राणायाम और मार्जन: शुद्धि🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 4अघमर्षण और मनसा-परिक्रमा🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 5उपस्थान और गायत्री मन्त्र🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 6समर्पण: सन्ध्या को दैनिक जीवन में उतारना🔒 नामांकन के बाद खुलेगा