पुराण इतिहास · PUR-118
वामन पुराण
Vāmana Purāṇa
वामन पुराण
वामन पुराण भगवान विष्णु के वामन अवतार पर केन्द्रित है, जो दानी असुरराज बलि से तीन पग भूमि माँगते हैं और फिर तीनों लोकों को नाप लेते हैं। मुख्य रूप से महर्षि पुलस्त्य द्वारा नारद को कहे गए इस ग्रन्थ में शैव सामग्री, देवी की कथाएँ और कुरुक्षेत्र तथा सरस्वती क्षेत्र के तीर्थों का विस्तृत वर्णन भी है। इसका अध्ययन दिखाता है कि एक ही पुराण वैष्णव, शैव और शाक्त परम्पराओं को साथ कैसे समेटता है।
आप क्या सीखेंगे
- वामन और बलि की कथा और उसके अर्थ
- कुरुक्षेत्र और पवित्र सरस्वती क्षेत्र
- वैष्णव, शैव और शाक्त कथाओं का सह-अस्तित्व
पाठ
- 1वामन पुराण: परिचय🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 2पुलस्त्य, नारद और कथा-क्रम🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 3ग्रन्थ में शिव और देवी🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 4कुरुक्षेत्र और उसके तीर्थ🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 5राजा बलि: दान और भक्ति🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 6वामन के तीन पग🔒 नामांकन के बाद खुलेगा