दर्शन उपनिषद् · DAR-104
विवेकचूडामणि
Vivekacūḍāmaṇi
विवेकचूडामणि
विवेकचूडामणि — 'विवेक का मुकुटमणि' — अद्वैत वेदान्त का अत्यन्त प्रिय पद्य-ग्रन्थ है। परम्परा इसे आदि शंकराचार्य की रचना मानती है, यद्यपि कुछ आधुनिक विद्वान् इस पर प्रश्न उठाते हैं। गुरु और सच्चे जिज्ञासु के संवाद के रूप में यह ग्रन्थ अध्यात्म-अध्ययन की योग्यताओं, आत्मा और पंचकोश के भेद, अविद्या के स्वरूप तथा जीवन्मुक्त की स्वतन्त्रता को स्पष्ट करता है। अद्वैत की ओर आकर्षित हर साधक के लिए यह एक सरल और व्यावहारिक मार्गदर्शक है।
आप क्या सीखेंगे
- जिज्ञासु के लिए साधन-चतुष्टय
- देह, मन और कोशों से आत्मा का विवेक
- जीवन्मुक्त के लक्षण
पाठ
- 1परिचय: विवेक का मुकुटमणि🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 2जिज्ञासु और गुरु🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 3साधन-चतुष्टय🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 4पंचकोश और आत्मा🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 5माया, अविद्या और अध्यास🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 6जीवन्मुक्ति🔒 नामांकन के बाद खुलेगा