पुराण इतिहास · PUR-116

कूर्म पुराण

Kūrma Purāṇa

गुरुवभगवान विष्णुसंकायपुराण और इतिहास
इस पाठ्यक्रम के बारे में

कूर्म पुराण

कूर्म पुराण भगवान विष्णु के कूर्म अवतार द्वारा कहा गया है, जिन्होंने समुद्र-मन्थन के समय मन्दराचल पर्वत को धारण किया था। कथा-ढाँचा वैष्णव होते हुए भी इसका बड़ा भाग शिव की महिमा गाता है, और विष्णु तथा शिव की एकता दिखाना इसकी विशेषता है। इसमें सृष्टि, लोक, राजवंश और धर्म का वर्णन है, तथा उत्तर भाग में ईश्वर गीता है — एक दार्शनिक संवाद जिसमें शिव ऋषियों को आत्मा, योग और भक्ति का उपदेश देते हैं, जो भगवद्गीता की याद दिलाता है।

आप क्या सीखेंगे

  • कूर्म अवतार और समुद्र-मन्थन
  • ग्रन्थ विष्णु और शिव में समन्वय कैसे करता है
  • ईश्वर गीता के उपदेश

पाठ

  1. 1कूर्म पुराण: परिचय🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  2. 2कूर्म अवतार और समुद्र-मन्थन🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  3. 3सृष्टि, लोक और राजवंश🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  4. 4विष्णु और शिव की एकता🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  5. 5धर्म, आश्रम और कर्तव्य🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  6. 6ईश्वर गीता: आत्मा और योग🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
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