पुराण इतिहास · PUR-121

रामचरितमानस

Rāmacaritamānasa

गुरुतगोस्वामी तुलसीदाससंकायपुराण और इतिहास
इस पाठ्यक्रम के बारे में

रामचरितमानस

रामचरितमानस, अर्थात् 'राम के चरित का सरोवर', की रचना गोस्वामी तुलसीदास ने सोलहवीं शताब्दी में अवधी में की। मुख्यतः चौपाइयों और बीच-बीच में दोहों में रचित यह ग्रन्थ सात काण्डों में रामकथा को कई संवादों के माध्यम से कहता है, जैसे शिव-पार्वती संवाद और काकभुशुण्डि-गरुड़ संवाद। गहरी भक्ति से भरा यह ग्रन्थ असंख्य घरों में प्रतिदिन पढ़ा जाता है और पूरे उत्तर भारत में रामलीला के रूप में मंचित होता है। इसका अध्ययन रामभक्ति की जीवित परम्परा से जोड़ता है।

आप क्या सीखेंगे

  • सात काण्ड और उनके संवाद-ढाँचे
  • तुलसीदास की भाषा, छन्द और भक्ति-दृष्टि
  • आज के पाठ और रामलीला पर मानस का प्रभाव

पाठ

  1. 1रामचरितमानस: परिचय🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  2. 2तुलसीदास, अवधी और मानस की भूमिका🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  3. 3बालकाण्ड: शिव, पार्वती और राम-जन्म🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  4. 4अयोध्या से अरण्य: भरत और वनवास🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  5. 5सुन्दरकाण्ड: हनुमान की भक्ति🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
  6. 6लंका, उत्तर और भक्ति-मार्ग🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
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