भक्ति स्तोत्र · BHK-102
श्री नारायण कवच
Nārāyaṇa Kavaca
श्री नारायण कवच
श्री नारायण कवच, अर्थात् 'नारायण का रक्षा-कवच', श्रीमद्भागवत के छठे स्कन्ध में आता है। जब इन्द्र और देवताओं ने रक्षा की प्रार्थना की, तब आचार्य विश्वरूप ने उन्हें यह स्तोत्र सिखाया, जिसके प्रभाव से उन्होंने पुनः बल प्राप्त किया। न्यास-विधि के पश्चात् यह कवच भगवान विष्णु के अनेक रूपों और आयुधों का आवाहन करता है, ताकि वे हर दिशा और हर परिस्थिति में भक्त की रक्षा करें। यह पाठ्यक्रम इसके कथा-प्रसंग, प्रत्येक आवाहन के अर्थ और पारम्परिक पाठ-विधि को समझाता है।
आप क्या सीखेंगे
- भागवत की वह कथा जिसमें कवच का उपदेश हुआ
- विष्णु के विविध रूपों के आवाहन का अर्थ
- पारम्परिक न्यास और पाठ की विधि
पाठ
- 1परिचय: भागवत में नारायण कवच🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 2इन्द्र, विश्वरूप और कथा-प्रसंग🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 3न्यास: तन और मन की तैयारी🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 4रक्षा हेतु विष्णु-अवतारों का आवाहन🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 5दिव्य आयुध और उनका प्रतीकार्थ🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 6अर्थ सहित कवच का पाठ🔒 नामांकन के बाद खुलेगा