योग · YOG-101
पातञ्जल योग दर्शन
Patañjali Yoga Darśana
पातञ्जल योग दर्शन
महर्षि पतञ्जलि के योगसूत्र भारतीय दर्शन के छह आस्तिक दर्शनों में से एक, योग-दर्शन का मूल ग्रन्थ हैं। चार पादों में ये योग को 'चित्तवृत्तिनिरोध' के रूप में परिभाषित करते हैं, मन को विचलित करने वाले विघ्नों और क्लेशों का वर्णन करते हैं, यम से समाधि तक अष्टांग योग प्रस्तुत करते हैं, और अन्त में कैवल्य — शुद्ध चैतन्य की स्वतन्त्रता — तक पहुँचते हैं। हिन्दी व्याख्या सहित गीता प्रेस का यह संस्करण सूत्रों में सावधानीपूर्वक प्रवेश का मार्ग देता है।
आप क्या सीखेंगे
- योग का अर्थ: चित्तवृत्तिनिरोध
- अष्टांग योग के आठ अंगों का अभ्यास
- क्लेश, समाधि और कैवल्य का लक्ष्य
पाठ
- 1परिचय: पतञ्जलि और योग-दर्शन🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 2समाधि पाद: चित्त का निरोध🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 3साधन पाद: क्लेश और क्रियायोग🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 4अष्टांग: यम से प्रत्याहार तक🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 5विभूति पाद: धारणा, ध्यान, समाधि🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 6कैवल्य पाद: चैतन्य की स्वतन्त्रता🔒 नामांकन के बाद खुलेगा