आयुर्वेद · AYU-102
सुश्रुत संहिता
Suśruta Saṃhitā
सुश्रुत संहिता
सुश्रुत संहिता आयुर्वेद के शल्य-तन्त्र (शल्य-चिकित्सा) का महान ग्रन्थ है। परम्परा के अनुसार यह काशीराज दिवोदास धन्वन्तरि द्वारा अपने शिष्य सुश्रुत को दिया गया उपदेश है। इसके स्थानों में सिद्धान्त, रोग-निदान, शरीर-रचना, चिकित्सा और विष-विज्ञान का वर्णन है, जिसके बाद उत्तरतन्त्र आता है। यह ग्रन्थ शल्य-यन्त्रों के वर्णन, अभ्यास-प्रतिरूपों पर शिष्यों के प्रशिक्षण और नासिका-पुनर्रचना के विवरण के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ इसका अध्ययन चिकित्सा-इतिहास की धरोहर के रूप में होगा, उपचार-मार्गदर्शन के रूप में नहीं।
आप क्या सीखेंगे
- सुश्रुत संहिता का उद्भव और संरचना
- शल्य-यन्त्रों और शिष्य-प्रशिक्षण का वर्णन
- प्लास्टिक सर्जरी के विवरण का ऐतिहासिक महत्त्व
पाठ
- 1परिचय: सुश्रुत और शल्य-तन्त्र🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 2धन्वन्तरि, काशी और ग्रन्थ-परम्परा🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 3सूत्रस्थान: शल्य-वैद्य का प्रशिक्षण🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 4यन्त्र और शस्त्र: शल्य-उपकरण🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 5शारीरस्थान: सुश्रुत की शरीर-दृष्टि🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 6नासिका-पुनर्रचना और उत्तरतन्त्र🔒 नामांकन के बाद खुलेगा