तन्त्र · TAN-101
विज्ञान भैरव तन्त्र
Vijñāna Bhairava Tantra
विज्ञान भैरव तन्त्र
विज्ञान भैरव तन्त्र काश्मीर शैव परम्परा का एक संक्षिप्त किन्तु प्रकाशमय ग्रन्थ है, जिसे परम्परा रुद्रयामल तन्त्र का अंश मानती है। इसका आरम्भ भैरवी (देवी) के उस प्रश्न से होता है जिसमें वे भैरव (शिव) से परम सत्य का स्वरूप पूछती हैं; उत्तर में शिव सिद्धान्त नहीं, बल्कि 112 धारणाएँ देते हैं — श्वास, इन्द्रियों, नाद, आकाश, भावनाओं और दैनिक क्षणों पर आधारित ध्यान की विधियाँ। आदियोगी शिव की परम्परा में इसका अध्ययन करते हुए आप इस संवाद का दर्शन समझेंगे और इसकी साधनाओं को सहज व सुरक्षित ढंग से अपनाना सीखेंगे।
आप क्या सीखेंगे
- संवाद की पृष्ठभूमि और उसकी चेतना-दृष्टि
- श्वास, नाद, आकाश और इन्द्रियों पर आधारित प्रमुख धारणाएँ
- इन ध्यान-विधियों को दैनिक जीवन में सुरक्षित रूप से अपनाना
पाठ
- 1परिचय: भैरव-भैरवी संवाद🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 2भैरवी के प्रश्न: परम सत्य क्या है?🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 3श्वास और प्राण की धारणाएँ🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 4नाद, मन्त्र और मौन🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 5आकाश, इन्द्रियाँ और दैनिक सजगता🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 6साधनाओं को जीवन में उतारना🔒 नामांकन के बाद खुलेगा