वेद विद्या · VED-103
यजुर्वेद
Yajurveda
यजुर्वेद
यजुर्वेद यज्ञ का वेद है — इसमें गद्य और पद्य में वे यजुष् मन्त्र हैं जिन्हें यज्ञ सम्पन्न कराने वाला अध्वर्यु पढ़ता है। इसकी दो प्रमुख शाखाएँ हैं — कृष्ण और शुक्ल; शुक्ल यजुर्वेद का सम्बन्ध परम्परा से महर्षि याज्ञवल्क्य से जोड़ा जाता है। इसका चालीसवाँ अध्याय सुप्रसिद्ध ईशोपनिषद् है। इस पाठ्यक्रम में शुक्ल यजुर्वेद को स्वामी दयानन्द सरस्वती के भाष्य के माध्यम से पढ़ा जाता है, जो प्रत्येक मन्त्र के याज्ञिक प्रयोग के साथ उसका नैतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक अर्थ भी खोलता है।
आप क्या सीखेंगे
- कृष्ण और शुक्ल शाखाएँ तथा उनका अन्तर
- अध्वर्यु की भूमिका और यज्ञ का तर्क
- यजुर्वेद-मन्त्रों की व्याख्या की दयानन्दीय दृष्टि
पाठ
- 1परिचय: यज्ञ का वेद🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 2कृष्ण और शुक्ल: दो शाखाएँ🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 3यजुष् मन्त्र और अध्वर्यु🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 4स्वामी दयानन्द की भाष्य-पद्धति🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 5समाज और धर्ममय जीवन के मन्त्र🔒 नामांकन के बाद खुलेगा
- 6ईशोपनिषद्: चालीसवाँ अध्याय🔒 नामांकन के बाद खुलेगा